No title

दिल ने माना जुबा ने ये इकरार की 
 आप जैसा नहीं कोई संसार में
आसमान से उतर कर हमारे लिए
 तुम सहारा बने  मेरा प्यार में
खुल्द की तुम नहीं हो मैं क्यों मांन लूं
कुछ भी सच्चाई हो मैं क्यों जान लूं
तेरा पूजा न छोडू चाहे जो हो सजा

कुफ्र हो जाएगा मेरे इनकार में

हां पता था बहारें ठहरतीं नहीं
इस तरह की भी न उम्मीद थी

सुबह शाम बस इक झलक देखना
यकीं मानो हमारे लिए ईद थी
मान अपना हमारा बसा प्रान है 
पायलों की तेरे इन झन्कार में 
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