आबरू उछाली गई अदालत में बुला केअपने हैं दर किनार किया हमने भुला के आंखों में बसे रहते थे हम जिसके रात दिननजरें ही उसने फेर लिया नजरें मिला के शायर शादाब हुसैन एडवोकेट सिविल कोर्ट बहराइच
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